सतवास। मुख्य बाजार स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की सरकारी जमीन पर अवैध रजिस्ट्री कर कब्जा करने के प्रयास के खिलाफ आखिरकार प्रशासन सक्रिय हो गया है। तीन माह पहले नागरिकों के प्रतिनिधि मंडल ने जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में आपत्ति दर्ज कर जमीन से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत किए थे। इसके बाद मामले में प्रशासन द्वारा जांच प्रारम्भ की गई। नागरिकों की शिकायत पर सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल और बागली विधायक मुरली भंवरा ने भी हस्तक्षेप करते हुए कलेक्टर सहित उच्च अधिकारियों को उचित कार्रवाई के निर्देश दिए। निर्देशों के बाद कलेक्टर ने पूरे 346 रकबे, जिसमें 93 मकान और सैकड़ों रहवासी शामिल हैं, पर नए निर्माण कार्यों पर रोक लगा दी थी।
जांच में उजागर हुआ सच
जांच टीम द्वारा सभी भवनों और भूमि दस्तावेजों की जांच की गई। लंबे समय से निवास कर रहे नागरिकों को अतिक्रमणकर्ता की ओर से प्रस्तुत भ्रामक तथ्यों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ा। जांच में पाया गया कि सिर्फ नारायण सोनी द्वारा कराए गए लेख निष्पादन के आधार पर ही सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का प्रयास किया गया था। इस पर जिला कलेक्टर ने मंगलवार को कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में मुख्य बाजार क्षेत्र 346 में नए निर्माण पर लगी रोक को हटा दिया गया है। साथ ही सरकार को अपनी भूमि मुक्त कराने हेतु न्यायालय में पक्ष रखने तथा आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश सतवास तहसीलदार को दिए गए हैं। निर्णय के बाद नगर में हर्ष का वातावरण है।
जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रिया
नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि सतनाम सिंह बग्गा ने कहा कि यह कदम सरकार की विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने सांसद और विधायक का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भूमि मुक्त होने के बाद नगर के हित में नया कॉम्प्लेक्स अवश्य बनेगा। वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश जोशीला ने इसे प्रशासन की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि जमीन मुक्त होते ही 100 दुकानों का निर्माण नगर विकास का महत्वपूर्ण कदम होगा।
शिकायतकर्ता ने कहा कि यह कार्रवाई काफी पहले हो जानी चाहिए थी, फिर भी यह संतोषजनक है। उन्होंने जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नगर हित की लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।
Author: रिपोर्टर—रवि कुमरे
पत्रकार | सच की आवाज़





