चकल्दी /सीहोर, 4 अगस्त। मध्यप्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश की 16 शासकीय आदिवासी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थाओं (आईटीआई) का संचालन परम फाउंडेशन को सौंपे जाने के प्रस्ताव के विरोध में मंगलवार को एकलव्य शासकीय आदिवासी आईटीआई, चकलदी (सीहोर) के विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने सरकार से हस्तांतरण की प्रक्रिया तत्काल निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि इससे उनके भविष्य, तकनीकी शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
प्रदर्शन के दौरान बुधनी विधानसभा की पूर्व विधायक प्रत्याशी एवं सामाजिक कार्यकर्ता साधना उइके भी विद्यार्थियों के बीच पहुंचीं और उनकी समस्याएं सुनीं। उन्होंने कहा कि सरकारी तकनीकी शिक्षण संस्थानों को निजी संस्था के हवाले करना आदिवासी एवं आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के हितों के विरुद्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना विद्यार्थियों, अभिभावकों और जनप्रतिनिधियों से व्यापक चर्चा किए यह निर्णय लिया गया है।
विद्यार्थियों ने कहा कि सरकारी आईटीआई का उद्देश्य गरीब और आदिवासी युवाओं को सुलभ एवं गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना है। यदि इन संस्थानों का संचालन निजी संस्था को सौंपा गया, तो शिक्षा महंगी होने और प्रशिक्षण की गुणवत्ता तथा रोजगार के अवसरों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
साधना उइके ने राज्य सरकार से मांग की कि परम फाउंडेशन को 16 शासकीय आदिवासी आईटीआई सौंपने की प्रक्रिया तत्काल निरस्त की जाए तथा संस्थानों का संचालन शासन के अधीन ही रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने निर्णय वापस नहीं लिया, तो विद्यार्थियों, आदिवासी समाज और सामाजिक संगठनों के साथ लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा।
प्रदर्शन में जिला पंचायत सदस्य विजेंद्र उइके, सामाजिक कार्यकर्ता फ़हीम भाई, संदीप जी, प्रदीप जी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में सरकार से निर्णय वापस लेने की मांग की।
Author: रिपोर्टर—रवि कुमरे
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