इंदौर। भारत आदिवासी पार्टी (BAP) ने गुजरात के डेडियापाड़ा से विधायक चेतर भाई वसावा के समर्थन में भारत की राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर उनकी सात वर्ष की सजा रद्द करने की मांग की है। पार्टी ने आरोप लगाया कि आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन के अधिकारों की लड़ाई लड़ने के कारण चेतर वसावा को राजनीतिक षड्यंत्र के तहत सजा दिलाई गई है।
ज्ञापन में बताया गया कि 30 अक्टूबर 2023 को डेडियापाड़ा क्षेत्र में वन भूमि से जुड़े विवाद के बाद विधायक चेतर भाई वसावा, उनकी पत्नी शकुंतला वसावा सहित नौ लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके बाद 23 जून 2026 को न्यायालय ने सभी आरोपियों को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई। पार्टी का कहना है कि यह कार्रवाई वन विभाग द्वारा कथित रूप से गलत तथ्यों और राजनीतिक दबाव के आधार पर की गई।
भारत आदिवासी पार्टी ने राष्ट्रपति से संविधान के अनुच्छेद-72 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग कर चेतर वसावा की सजा माफ अथवा निरस्त करने का आग्रह किया है। साथ ही संविधान की पांचवीं अनुसूची वाले क्षेत्रों में लागू भारतीय वन अधिनियम-1927, वन (संरक्षण) अधिनियम-1980 तथा वन अधिकार अधिनियम-2006 के क्रियान्वयन और वैधता की व्यापक समीक्षा कराने की भी मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के संवैधानिक अधिकारों, पेसा अधिनियम-1996 तथा वन अधिकार अधिनियम-2006 के प्रावधानों का समुचित पालन नहीं हो रहा है। इससे आदिवासी समुदाय के पारंपरिक अधिकार प्रभावित हो रहे हैं और समाज में असंतोष बढ़ रहा है।
पार्टी ने मांग की है कि यदि प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई का विधिक आधार संदिग्ध पाया जाता है तो पूरे प्रकरण की निष्पक्ष कानूनी समीक्षा कराई जाए। साथ ही राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की अनुशंसाओं के अनुरूप जनजातीय सलाहकार परिषद (TAC) से परामर्श लेकर अनुसूचित क्षेत्रों में वन कानूनों का न्यायसंगत और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
भारत आदिवासी पार्टी के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष कोमल धोपिया ने कहा कि राष्ट्रपति से आदिवासी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा, न्याय व्यवस्था में विश्वास बनाए रखने तथा अनुसूचित क्षेत्रों में कानूनों के निष्पक्ष क्रियान्वयन के लिए आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की गई है।
Author: रिपोर्टर—रवि कुमरे
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