अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। आठ आरोपियों की गिरफ्तारी, लगभग ₹79.85 लाख की बरामदगी और अब सामने आए कथित 5 जून 2026 के CCTV फुटेज के बाद पूरे मामले को लेकर कई नए सवाल खड़े हो गए हैं।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 5 जून को ट्रस्ट के प्रतिनिधियों और पुलिस टीम ने एक आरोपी के घर पहुंचकर कार्रवाई की थी, जहां से करीब ₹5 लाख नकद बरामद किए गए थे। हालांकि, इस संबंध में औपचारिक एफआईआर बाद में दर्ज की गई। इसी वजह से यह सवाल उठ रहे हैं कि यदि प्रारंभिक जानकारी पहले से मौजूद थी तो कानूनी कार्रवाई में देरी क्यों हुई।
जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनके ठिकानों पर छापेमारी के दौरान नकदी, जेवरात और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। पुलिस इनकी आय के स्रोत और कथित गबन से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है।
मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं विपक्ष ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। कुछ राजनीतिक दलों ने मामले की CBI जांच कराने की भी मांग की है।
इस बीच अयोध्या के कुछ अधिवक्ताओं ने बैठक कर आरोपियों की पैरवी नहीं करने का निर्णय लेने का दावा किया है। साथ ही ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठाई गई है।
हालांकि, मामले की जांच अभी जारी है और कई तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में किसी भी व्यक्ति या संस्था की भूमिका को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। जांच एजेंसियों और न्यायालय की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में इस मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच को लेकर लोगों की अपेक्षाएं बढ़ गई हैं। आमजन की मांग है कि दोषी चाहे कोई भी हो, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो, ताकि मंदिर की व्यवस्था और श्रद्धालुओं का विश्वास दोनों कायम रह सकें।
Author: रिपोर्टर—रवि कुमरे
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