बीजेपी की दो और कांग्रेस की एक सीट लगभग तय, उम्मीदवारों के नामों पर अंतिम फैसला जल्द
भोपाल। मध्य प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले दोनों प्रमुख दलों में उम्मीदवारों के चयन को लेकर मंथन जारी है। नामांकन की अंतिम तिथि 8 जून होने के कारण अब जल्द ही प्रत्याशियों के नामों की घोषणा होने की संभावना है।
विधानसभा के वर्तमान गणित के अनुसार राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 विधायकों के वोट आवश्यक हैं। बीजेपी के पास 164 विधायक होने के कारण उसकी दो सीटें सुरक्षित मानी जा रही हैं, जबकि कांग्रेस के 62 विधायक उसकी एक सीट के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि कांग्रेस के सामने क्रॉस वोटिंग और कुछ तकनीकी चुनौतियों से बचना भी महत्वपूर्ण रहेगा।
कांग्रेस की ओर से इस बार राज्यसभा भेजे जाने वाले चेहरे को लेकर कई नाम चर्चा में हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। वहीं संगठन के भीतर आदिवासी, पिछड़ा वर्ग या युवा चेहरे को मौका देने की मांग भी उठ रही है। अंतिम निर्णय पार्टी आलाकमान द्वारा लिया जाएगा।
उधर बीजेपी में दो सीटों के लिए दावेदारों की लंबी सूची है। कैलाश विजयवर्गीय, प्रहलाद पटेल, नरोत्तम मिश्रा और अरविंद भदौरिया जैसे नेताओं के नाम राजनीतिक चर्चाओं में बने हुए हैं। लेकिन पार्टी की कार्यशैली को देखते हुए अंतिम सूची में कोई नया और अप्रत्याशित चेहरा भी सामने आ सकता है।
इस बीच झाबुआ अंचल से पूर्व सांसद जीएस डामोर का नाम भी प्रमुखता से उभर रहा है। आदिवासी समाज से आने वाले डामोर को संगठननिष्ठ नेता माना जाता है। सांसद टिकट कटने के बाद भी उन्होंने पार्टी के फैसले का खुलकर विरोध नहीं किया, जिसे उनके पक्ष में एक महत्वपूर्ण बिंदु माना जा रहा है।
झाबुआ क्षेत्र से ही सामाजिक कार्यकर्ता महेश शर्मा का नाम भी चर्चाओं में है। जल संरक्षण और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके कार्यों को देखते हुए उन्हें संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है।प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिए हैं कि संगठन स्तर पर नाम लगभग तय हो चुके हैं और अब अंतिम निर्णय केंद्रीय नेतृत्व को लेना है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में जातीय, क्षेत्रीय, आदिवासी, ओबीसी और महिला प्रतिनिधित्व जैसे समीकरण महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में अंतिम सूची आने तक सियासी अटकलों का दौर जारी रहने की संभावना है।
Author: रिपोर्टर—रवि कुमरे
पत्रकार | सच की आवाज़





