धार जिले की कुक्षी तहसील में प्रस्तावित चुना-पत्थर फैक्ट्री के विरोध में आज व्यापक स्तर पर महाआंदोलन किया गया। राजस्थान की श्री सीमेंट (श्रीराम चुना-पत्थर) कंपनी द्वारा खनिज खोज के नाम पर लगभग 8 से 10 गांवों की जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू किए जाने से आदिवासी समाज में भारी रोष व्याप्त है। आंदोलनरत आदिवासियों का कहना है कि वे सदियों से इस क्षेत्र में निवास करते आए हैं और आज उन्हें उनके जल, जंगल और जमीन से बेदखल किया जा रहा है।
खनिज खोज के लिए शुरू की गई ड्रिलिंग के विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीण धरना-प्रदर्शन में शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए 7 दिवसीय समिति के गठन तथा आदिवासी समाज की सहमति से ही किसी भी प्रकार का निर्णय लेने की मांग की।
प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि फिलहाल ड्रिलिंग केवल शासकीय भूमि पर ही की जाएगी। प्रशासन ने यह भी कहा कि यदि ड्रिलिंग के दौरान उपयोगी चुना-पत्थर मिलने की पुष्टि होती है, तभी कंपनी आगे की प्रक्रिया अपनाएगी। बावजूद इसके ग्रामीणों का कहना है कि यह प्रक्रिया आगे चलकर निजी भूमि और आजीविका पर सीधा प्रभाव डालेगी।
आदिवासी समाज का आरोप है कि श्री सीमेंट कंपनी खनिज खोज की आड़ में आदिवासियों और कमजोर वर्गों की जमीन एवं रोजगार छीनने की दिशा में आगे बढ़ रही है। आंदोलनकारियों ने इसे भाजपा सरकार की आदिवासी विरोधी नीति करार दिया।
कुक्षी में यह आंदोलन अरावली पर्वत श्रृंखला तथा सिंगरौली क्षेत्र में हो रही बड़े पैमाने की जंगल कटाई जैसे गंभीर पर्यावरणीय मुद्दों से भी जुड़ा बताया जा रहा है। वक्ताओं ने कहा कि पेसा एक्ट के तहत ग्राम सभाओं को दिए गए अधिकार आज भी केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर उनका पालन नहीं हो रहा है।
एक ओर प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे.पी. नड्डा करोड़ों रुपये की परियोजनाओं के लोकार्पण में व्यस्त रहे, वहीं दूसरी ओर आदिवासी समाज अपने अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर संघर्ष करता नजर आया। यह स्थिति सरकार की प्राथमिकताओं, आदिवासी हितों के प्रति उदासीनता और जनभावनाओं से दूरी को उजागर करती है।
Author: रिपोर्टर—रवि कुमरे
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