देवास जिले में स्थित खिवनी अभ्यारण्य इन दिनों प्रकृति और वन्यजीव प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। विंध्य पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा यह अभ्यारण्य लगभग 134 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है, जिसमें देवास और सीहोर जिले का क्षेत्र शामिल है। घने जंगल, पहाड़ियां, नदी-नाले और समृद्ध जैव विविधता इसे मध्यप्रदेश के चुनिंदा इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल कर रही है।
खिवनी अभ्यारण्य में बाघ, तेंदुआ, भालू, लकड़बग्घा जैसे मांसाहारी जीवों के साथ चीतल, सांभर, नीलगाय, चौसिंगा सहित कई शाकाहारी प्रजातियां पाई जाती हैं। वहीं लगभग 170 प्रजातियों के पक्षी और 65 प्रकार की तितलियां इसकी प्राकृतिक समृद्धि को और बढ़ाती हैं। वर्षाकाल में झरने, घाटियां और हरियाली पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करती है।
पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए अभ्यारण्य में सर्वसुविधायुक्त टूरिस्ट कैंपस, कॉटेज, टेंट, वॉच टॉवर और जंगल सफारी की व्यवस्था की गई है। कलेक्टर श्री ऋतुराज सिंह एवं डीएफओ श्री अमित सिंह चौहान के मार्गदर्शन में खिवनी अभ्यारण्य को पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख स्थान दिलाने के लिए लगातार मॉनिटरिंग और व्यवस्थागत सुधार किए जा रहे हैं।
ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के माध्यम से स्थानीय समुदाय को रोजगार से जोड़ा गया है। सफारी संचालन, आवास प्रबंधन, भोजन व्यवस्था और लघु हस्तशिल्प के जरिए ग्रामीणों की आय में वृद्धि हो रही है।
भोपाल-इंदौर के मध्य स्थित होने के कारण खिवनी अभ्यारण्य तक पहुंचना आसान है। समीपस्थ रेलवे स्टेशन हरदा तथा नजदीकी एयरपोर्ट इंदौर और भोपाल हैं। पर्यटक mpforest.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग कर अभ्यारण्य की सैर कर सकते हैं।प्रकृति की शांति, वन्यजीवों की झलक और विंध्याचल की सुंदरता को करीब से देखने के इच्छुक पर्यटकों के लिए खिवनी अभ्यारण्य एक आदर्श गंतव्य के रूप में उभर रहा
Author: रिपोर्टर—रवि कुमरे
पत्रकार | सच की आवाज़





