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नल-जल योजना काग़ज़ों में चालू, हकीकत में सूखी नलियां पानी के लिए 120 KM दूर कलेक्टर के दरबार पहुँचे आदिवासी

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देवास।

कन्नौद जनपद की ग्राम पंचायत भिलाई में भीषण जल संकट से त्रस्त आदिवासी ग्रामीणों ने प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ आवाज़ बुलंद की। गांव के आदिवासी मोहल्लों के बच्चे, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा करीब 120 किलोमीटर का सफर तय कर देवास कलेक्टर कार्यालय पहुँचे और जनसुनवाई में अपनी पीड़ा प्रशासन के सामने रखी।ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी नल-जल योजना (जल जीवन मिशन) काग़ज़ों में चालू दर्शाई जा रही है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर स्थिति बेहद चिंताजनक है। पूरे गांव और आदिवासी मोहल्लों में एक बूंद पानी नहीं पहुँच रहा, जबकि पंचायत और विभागीय रिकॉर्ड में योजना को सफल बताया गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि एसडीएम कन्नौद को पूर्व में शिकायत देने के बावजूद कोई निराकरण नहीं हुआ, बल्कि पंचायत के दबंग लोगों द्वारा पानी की आपूर्ति ही बंद कर दी गई। दबंगों के दबाव में आदिवासी मोहल्लों को जानबूझकर पानी से वंचित रखा जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार पंचायत सचिव पवन प्रजापति एवं पीएचई विभाग की इंजीनियर छाया दुबे द्वारा कुएं एवं ट्यूबवेल को सूखा घोषित कर पंचनामा तो तैयार किया गया, लेकिन इसके बाद न तो वैकल्पिक जल व्यवस्था की गई और न ही टैंकर की व्यवस्था कराई गई।

जनसुनवाई में मौजूद महिलाओं ने बताया कि उन्हें कई किलोमीटर दूर से पानी ढोना पड़ रहा है, जिससे छोटे बच्चे, बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं सबसे अधिक प्रभावित हो रही हैं। पानी की तलाश में रोज़मर्रा की ज़िंदगी ठप हो गई है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि कन्नौद विकासखंड की गुड़बेल ग्राम पंचायत में नल-जल योजना की टंकी बने तीन साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन आज तक ग्रामीणों को पानी उपलब्ध नहीं कराया गया। काग़ज़ों में टंकी को चालू दिखाकर हैंडओवर कर दिया गया, जबकि मौके पर न तो निरीक्षण हुआ और न ही जल आपूर्ति शुरू की गई।

जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों की शिकायत को गंभीरता से सुनते हुए मामले की जांच कराने और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि अब जल्द ही उन्हें जल संकट से राहत मिलेगी।

नल-जल योजना एवं जल जीवन मिशन में हुए भ्रष्टाचार से जुड़े ऐसे और मामलों को हम लगातार उजागर करते रहेंगे।

रिपोर्टर—रवि कुमरे
Author: रिपोर्टर—रवि कुमरे

पत्रकार | सच की आवाज़

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