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सीएम के बेटे की शादी पर विवाद—पाँच दिन के कार्यक्रम और होटलों की बुकिंग पर उठे सवाल —वीआईपी सादगी या सादगी में वीआईपी?

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भोपाल।मुख्यमंत्री के छोटे बेटे डॉ. अभिमन्यु यादव की शादी को लेकर सरकार की ओर से दी गई सादगी की घोषणा अब विवादों के घेरे में है। शुरुआत में कहा गया था कि विवाह उज्जैन में सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान बेहद साधारण तरीके से होगा ताकि समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया जा सके। लेकिन जैसे-जैसे तैयारियों के विवरण सामने आ रहे हैं, सादगी का दावा कमजोर पड़ता दिख रहा है।

सूत्रों के मुताबिक, सामूहिक विवाह सम्मेलन में सिर्फ फेरे करवाए जाएंगे, जबकि विवाह से जुड़े बाकी रस्मों और कार्यक्रमों का सिलसिला पूरे पाँच दिनों तक चलेगा। इन कार्यक्रमों के लिए मुख्यमंत्री निवास के साथ-साथ भोपाल के दो बड़े होटलों की बुकिंग होने की जानकारी भी सामने आई है।बताया जा रहा है कि विवाह में मुख्यमंत्री के नज़दीकी रिश्तेदार, मंत्रिमंडल के सदस्य, वरिष्ठ अफसर, भाजपा संगठन से जुड़े पदाधिकारी और दिल्ली तक के कई बड़े नेता शामिल होंगे। इसी कारण यह बहस तेज हो गई है कि क्या यह आयोजन वास्तव में सादगी का उदाहरण है, या फिर औपचारिक सादगी के बीच वीआईपी का भव्य जमावड़ा?

सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखे तंज भी सामने आ रहे हैं—“हाथी के दाँत खाने के और, दिखाने के और…”

हालाँकि, यह भी सच है कि पहली बार कोई मुख्यमंत्री अपने बेटे के फेरे सामूहिक विवाह सम्मेलन में करवाने जा रहा है। समर्थक इसे एक सकारात्मक और प्रेरक कदम बता रहे हैं, जबकि विरोधियों का कहना है कि यह “सादगी की आड़ में वीआईपी आयोजन” है।

कुल मिलाकर, विवाह को लेकर छिड़ी यह राजनीतिक और सामाजिक बहस पूरे कार्यक्रम को सुर्खियों में ला चुकी है।

रिपोर्टर—रवि कुमरे
Author: रिपोर्टर—रवि कुमरे

पत्रकार | सच की आवाज़

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